अध्याय 93

सेथ के ये शब्द सुनते ही उसकी आँखों में कुछ स्याह और मालिकाना-सा चमक उठा—जुनून और पागलपन का साफ़, डरावना मिश्रण।

“हाँ, मैं पागल हूँ,” उसने मान लिया, आवाज़ खतरनाक फुसफुसाहट में उतर गई। “तलाक चाहिए? जिस दिन से तुमने उसका ज़िक्र किया है, उसी दिन से मैं पागल हूँ।”

बरसों पहले वही उसे टूटकर चाहती थी, उसी...

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